बयूरो : शहर की प्रेस्टीजियस जालंधर जिमखाना क्लब में 19 दिसंबर को मतदान है जिसके लिए सियासी उठापटक शुरू हो गई है क्योंकि रविवार सुबह से नामांकन प्रक्रिया आरंभ होनी है।
जिमखाना क्लब में 2 ग्रुप फिर से सक्रिय हो गए हैं। पहला ग्रुप है अचीवर्स तो दूसरा प्रोग्रेसिव ग्रुप है। अचीवर्स ग्रुप की तरफ से तरुण सिक्का दोबारा से ‘विकास पुरुष’ होने के चलते सेक्रेटरी पद के उम्मीदवार बनाए जा रहे हैं। इस ग्रुप में अमित कुकरेजा कैशियर और सौरव खुल्लर जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर दोबारा चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन जूनियर वाइस प्रेसिडेंट को लेकर पेच फंस गया है। अभी तक यह ग्रुप जूनियर वाइस प्रेसिडेंट के लिए किसी का नाम तय नहीं कर पाया है।
दूसरी तरफ प्रोग्रेसिव ग्रुप में सक्रियता बढ़ी है। इस ग्रुप से कुक्की बहल सेक्रेटरी के पोस्ट पर चुनाव लड़ सकते हैं। इस ग्रुप में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर इकलौती महिला उम्मीदवार अनु माटा और जूनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर गुलशन शर्मा चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। हालांकि इस ग्रुप में भी कैशियर के पद पर पेच फंसा हुआ है।
प्रोग्रेसिव ग्रुप में कैशियर की पोस्ट पर कोकी शर्मा, धीरज सेठ, दलजीत छाबड़ा और अमरीक घई चुनाव लड़ना चाहते हैं। जिससे अभी तक किसी एक का नाम फाइनल नहीं हो पाया है। दूसरी तरफ एसपीएस राजू विर्क सेक्रेटरी के पोस्ट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन राजू विर्क को ना तो अचीवर्स ग्रुप अपनी तरफ से लड़ाना चाहता है ना ही प्रोग्रेसिव ग्रुप। जिससे एसपीएस राजू विर्क आजाद प्रत्याशी के तौर पर बिना किसी ग्रुप के चुनाव लड़ सकते हैं।
जिमखाना क्लब में इस बार सबसे नई बात जो सामने आ रही है वह है ब्रदर्स ग्रुप। इस ग्रुप को बनाने वालों का दावा है कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन अचीवर्स ग्रुप और प्रोगेसिव ग्रुप के बेदाग प्रत्याशियों का समर्थन देंगे और खुद को किंग मेकर की भूमिका निभाएंगे।
वही इस जिमखाना चुनावों के बाद एक सेठ की राजनीति पर विराम लग जाएगा। सूत्रों अनुसार जहां पिछले चुनावों में धीरज सेठ को सेक्रेटरी पद का अगले चुनावों में इलेक्शन लड़ वाने का वायदा कर किसी भी पद पर इलेक्शन नहीं डलवाया गया था वहीं इस बार भी उन्हें अचीवर्स ग्रुप द्वारा कोई पद नहीं दिया जा रहा है। धीरज सेठ चाहे अचीवर्स ग्रुप में बगावत के सुर अभी नहीं बजा रहे लेकिन अंदर खाते दूसरे ग्रुप तथा आजाद प्रत्याशी के तौर पर लड़ने की जुगत लगा रहे हैं। अगर धीरज सेठ इस बार चुनाव नहीं लड़ते तो उनकी जिमखाना राजनीति पर विराम लग जाएगा।







