Home Punjab केबल माफिया पर शिकंजा चन्नी सरकार का सराहनीय फैसला

केबल माफिया पर शिकंजा चन्नी सरकार का सराहनीय फैसला

– ट्राई नियमों तहत 100 की बजाय 130 रुपए केबल के करे सरकार

– लोकल ग्राउंड केबल आपरेटर नहीं, इलीगल डिस्ट्रीब्यूटर हैं केबल माफिया

– पंजाब में तोड़ी जाए फास्टवे की मोनोपली, गरीबों के साथ हो रहा है धक्का

– मोनोपली टूटने से पंजाब के लोगों को मिलेगी सस्ती केबल, कईयों को मिलेगा रोजगार

ब्यूरो : तख्त बदल गए, ताज बदल गए, मगर पिछले 10-15 से नहीं बदला तो सिंडीकेट केबल माफिया। चन्नी सरकार ने अब इस सिंडीकेट केबल माफिया को खत्म करने का बीड़ा उठाया है। जिसका पंजाब भर के लाखों लोकल ग्राउंड केबल आपरेटर ने स्वागत किया है। लोकल ग्राउंड केबल आपरेटर ने कहा कि चन्नी सरकार का यह बेहद सराहनीय कदम है। लोगों के मन में यह संशय डाला गया है कि लोकल ग्राउंड केबल आपरेटर ही केबल माफिया है, जबकि हकीकत कुछ और है। हकीकत में पंजाब मे केबल माफिया इलीगल डिस्ट्रीब्यूर हैं, जिसे मल्टी सिस्टम आपरेटर (एमएसओ) ने इलीगल तौर पर प्रफुल्लित किया है। यह इलीगल डिस्ट्रीब्यूटर ही हर तरह की मनमानी कर रहा है और लोगों व केबल आपरेटर के साथ जमकर धक्केशाही की जा रही है।

पंजाब की बात करें तो यहां कई सालों से फास्टवे की इस पूरे गोरखधंधे में मोनोपली रही है। केबल के इस खेल में फास्टवे ने दूसरी किसी कंपनी को एंटर ही नहीं होने दिया है। मोनोपली के जरिए फास्टवे पूरी तरह से अपनी मनमर्जी चला रहा है और हर तरह की धज्जियां उड़ा रहा है। इस बात का खुलासा जालंधर केबल आपरेटर एसोसिएशन के महासचिव सन्नी चोपड़ा ने किया है। सन्नी चोपड़ा का कहना है कि सरकार व ट्राई ने सिर्फ तीन पक्षों को आथोराइजड किया है। नंबर एक ब्राडकास्टर, नंबर दो मल्टी सिस्टम आपरेटर और नंबर तीन लोकल ग्राउंड केबल आपरेटर। मगर मल्टी सिस्टम आपरेटर ने खुद को फायदा उठाने के लिए पूरे खेल में चौथे पक्ष डिस्ट्रीब्यूटर को इलीगल तौर पर बीच में डाल दिया और यही इलीगल डिस्ट्रीब्यूटर सारी मनमानी कर रहा है। उन्होंने बताया कि देश भर में मुख्य ब्राडकास्टर 5 या 6 हैं तो वहीं एमएसओ 15 से 20 के करीब हैं। मगर पंजाब में एक ही एमएसओ फास्टवे है, जिसकी पूरी मोनोपली है। मोनोपली होने के कारण वह अपनी तरह से पूरा खेल चलाता है और हर तरह की धक्केशाही की जाती है। किसी भी दूसरी पार्टी को पंजाब में एंटर ही नहीं होने दिया जाता है। जिसके कारण इलीगल तौर पर एंटर किए गया डिस्ट्रीब्यूटर ही माफिया बनकर न केवल सरकार के रेवेन्यू को करोड़ों की चपत लगा रहा है, बल्कि लोगों को भी जमकर लूटा जाता है। यह डिस्ट्रीब्यूटर केबल कनैक्शन व मंथली कनैक्शन के साथ-साथ 60 प्रतिशत कमाई एडवरटाइजमेंट से करता है। जिसका एक भी पैसा लोकल ग्राउंड केबल आपरेटर को नहीं दिया जाता है। यही नहीं कैरी फीस के तौर पर करोड़ों रुपए वसूले जाते हैं। इसके अलावा चैनल रिप्लेसमेंट व चैनल प्लेसमेंट के नाम पर करोड़ों का खेल खेला जाता है। सन्नी चोपड़ा ने बताया कि लोकल केबल आपरेटर की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने एक एलसीओ हैल्प डैस्क बनाई है। जिसके माध्यम से वह रैगुलर ट्राई, एमबीआई और सीसीआई को अपनी समस्या बताते रहते हैं। केबल माफिया के बारे भी टाइम टू टाइम जानकारी दी जाती है। वह पिछले 20 साल से केबल माफिया के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं और सभी विभागों को बार-बार बताया है कि अकाली सरकार से लेकर अब तक यह केबल माफिया खत्म नहीं हुआ है। यह माफिया सरकार के जीएसटी क्लैक्शन को भी करोड़ों का चूना लगा रहा है। एमएसओ माफिया ने इलीगल तौर पर सारा काम सुपर डिस्ट्रीब्यूटर बनाकर उन्हें सौंप दिया है। सारा कंट्रोल सुपर डिस्ट्रीब्यूटर को दे दिया। वह मर्जी से बिलिंग क्रिएट करता, मर्जी से पैसे लेते, मर्जी से जीएसटी नहीं देता, न बिल एनवायस देता, न वो सरकार की गाइडलाइंस को डायरैक्ट नान कंप्लाइस करता। जबकि लोकल ग्राउंड केबल आपरेटर की एकमात्र इंकम है मंथली क्लैक्शन। उस पर भी हमेशा यह केबल माफिया अपनी नजरें गड़ाए रहता है।

सन्नी चोपड़ा कहते हैं कि फास्टवे को मोनोपली के तहत दस साल से काम ट्राई ने नोटिस निकाले, सीसीआई कोर्ट ने 8 करोड़ रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया और साथ ही यह भी कहा कि वह धक्केशाही के साथ काम कर रहा है। कईयों का कारोबार जबरन बंद कर दिया गया, उनके घर उजड़ गए, कारोबार ठप्प हो गए। उन्हें पूरा पैसा तक नहीं मिल रहा है। जबकि केबल का असली माफिया इलीगल डिस्ट्रीब्यूटर पूरी मलाई खा रहा है। एमएसओ पंजाब में पूरी मोनोपली के तहत काम करता हैं, नए चैनल को एंटर नहीं होने देते, उन्हें ब्लैकमेल करते हैं। जबकि ट्राई की साफ गाइडलाइंस है कि 250 चैनल के 130 रुपए प्लस जीएसटी लीगली फीस वसूली जाए। जालंधर केबल आपरेटर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की इस घोषणा का स्वागत किया है कि अब केबल माफिया को खत्म किया जाएगा। साध ही एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के सामने यह मांग रखी है कि 100 रुपए महीन केबल की बजाय ट्राई की गाइडलाइंस के मुताबिक इसे 130 रुपए प्लस जीएसटी किया जाए। इससे केबल माफिया पर शिकंजा भी कसा जाएगा और लोकल ग्रांउड केबल आपरेटर भी अपना घर-बार चला सकते हैं।