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जालंधर : स्कूल प्रबन्धकों ने भी की जिला प्रशासन से मुलाकात, उठाई फीस वसूली के लिए आवाज, पढ़ें व देखें

– DC के जारी आदेश में ‘ब्लैकमेल, गुमराह’ जैसे शब्द इस्तेमाल कर लिखा विषय अभिभावकों की शिकायत से उठाया हुआ न कि DC ने लिखा

बयूरो : शहर में स्कूल फीसों को लेकर मुद्दा दिन प्रतिदिन गम्भीर होता जा रहा है। जहां गत दिवस अभिभावकों ने नवनिर्मित एसोसिएशन के बैनर तले जिला प्रशासन से मुलाकात की थी और DC घनशयाम थोरी के समक्ष फीस की एवज में रिजल्ट रोकने या फीसों की जबरन वसूली बारे शिकायत दर्ज करवाई थी। इन शिकायतों में जो विषय लिखा गया था जिसमे ‘ब्लैकमेल, गुमराह’ आदि शब्द लिखे गए थे जिसका जिक्र DC ने देर शाम एक आदेश जारी करते हुए DEO (सीनियर सेकंडरी) को माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना को यकीनी बनाने को कहा। इस तथ्य को कुछ लोगों द्वारा ऐसे प्रस्तुत किया गया कि जैसे अब फीस देनी ही नही। जबकि ऐसा कुछ नही है। विषय मे लिखे यह शब्द अभिभावकों की शिकायतों से उठाकर लिखे गए है और DC ने सिर्फ इतना ही कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना यकीनी बनाई जाए।

इसके पश्चात बुधवार को स्कूल प्रबन्धक भी फीस वसूली के मुद्दे को लेकर जिला प्रशासन को मिलने पहुंचे जहां DC घनशयाम थोरी ने उनको कहा कि उन्होंने ADC जसबीर सिंह को इस कार्य हेतु नियुक्त किया है। जिसके पश्चात प्रबन्धक ADC जसबीर से मिले जिन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना को यकीनी बनाने की बात कही। जिला प्रशासन व स्कूल प्रबन्धको ने एक दूसरे को आश्वस्त किया कि सुप्रीम कोर्ट अनुसार न तो किसी बच्चे की रिजल्ट रोके जाएंगे व न ही नाम काटा जाएगा तथा साथ ही माननीय सुप्रीम कोर्ट अनुसार 2019-20 की लंबित फीस सहित अकादमिक वर्ष 2020-21 की फीस पिछले वर्ष अनुसार 6 किश्तों में वसूली जाएगी। वही 2021-22 की फीस भी रूटीन में अभिभावक जमा करवा सकते है।

इस मौके पर मौजूद स्कूल प्रबन्धको ने कहा कि फीस न देने की एवज मे जिस प्रकार अभिभावक रवैया अपना रहे है वह खासा गलत है। जबकि स्कूल उन्हें पूर्ण तौर पर को-आपरेट कट रहे है। न तो किसी का रिजल्ट रोक जा रहा है और न ही नाम काटा जा रहा है। वही साथ कि 6 किश्ते भी की जा रही है लेकिन रिजल्ट लेकर भी अभिभावक फीस न देने की एवज में स्कूल परिसरों के बाहर तो कभी अन्य स्थानों पर एकत्रित होकर स्कूलो को बदनाम करने की साजिश रच रहे है जबकि उन्हीं स्कूलो में उनके बच्चे जहां शिक्षा प्राप्त करते है वही अच्छे संस्कार भी प्राप्त करते है। इस मौके पर एक सवाल के जवाब में स्कूल प्रबन्धको ने कहा कि जो सरकारी पोर्टल पर नोटिफाइड फीस ‘निल’ दर्ज है वह सरकारी स्कूलो पर लागू होती है जबकि फिर भी वहां कुछ फीस वसूली जाती है। वही निजी स्कूलो में नोटिफाइड फीस वह होती है जो उन्होंने अपने अकादमिक केलेंडर पर दर्ज की होती है। क्योंकि वह निजी स्कूलो के लिए ‘निल’ हो ही नही सकती क्योंकि ऐसी स्तिथि में निजी स्कूलो के खर्चे कहां से पूरे होंगे इसीलिए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने उसकी वसूली के लिए 6 माह का समय दिया है। ‘निल’ फीस वसूलने के लिए 6 माह की क्या जरूरत ? यह एक बड़ा सवाल है।