




ब्यूरो : मीनाक्षी स्याल को शिक्षा के क्षेत्र में उनके बेहतरीन प्रयासों और आसाधारण उपलब्धियों के लिए ड्रीम कैचर्स द्वारा भारत के प्रतिष्ठित शिक्षा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हे प्रख्यात व्यक्तित्वों की आकाश गंगा डॉ. संदीप मरवाह प्रेजीडेंट ऑफ इंटरनेशनल चैम्बर ऑफ मीडिया एण्ड एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री एंड चांसलर ऑफ एएएफआई, यूनिवर्सिटी आफ मीडिया एंड आर्ट, पद्मश्री डॉ. विजय कुमार एस. शाह, सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, गौरव गुप्ता, विजनेस गुरु एवं अंकितावर्मा, यूरोपियन बिजनेस वुमैन द्वारा प्रदान किया गया। स्याल ने शिक्षा के क्षेत्र में 41 वर्षों से अधिक समय से पूरे समपर्ण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया। उन्होंने इस प्रतिष्ठित संस्थान में डीन अकादमिक, नैक एवं यूजीसी कोआर्डिनेटर, एडमिशन कोआर्डिनेटर एवं कौशल पाठ्यक्रम के क्षेत्र में समन्वयक के रूप में पूरीनिष्ठा से सेवा की। उन्होंने जरूरतमंद एवं वित्तीय सहायता से वंचित छात्रों को कोचिंग और उचित मार्ग दर्शन भी प्रदान किया यहां तक कि कोविड 19 के संकट कालीन समय के साथ भी उन्होंने शिक्षण में कोई रूकावट नहीं उत्पन्न होने दी। इसके लिए उन्होंनेहर किसी के लिए भौतिकी के ज्ञान को प्रसारित करने के लिए अपनेयूट्यूब चैनल की शुरूआत की जोप्रत्येक विद्यार्थी के लिए फायदेमंद रहा। मीनाक्षी स्याल ने कौशल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए खुद को दिल से समर्पित किया ताकि वे महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र एवं विश्व स्तर पर सक्षम बना सकें। जब वे अपने छात्रों को सफलता के शिखर एवं उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, अनुसंधान वैज्ञानिक, प्रोफेसर, प्रशासक आदि प्रसिद्ध पदोपर आसीन होते देखती है तो उनका हृदय सतोष से भर जाता है। प्रिंसिपल डॉ. अजय सरीन ने उन्हें भारत के प्रतिष्ठित आइकॉनिक एजुकेशन अवार्ड प्राप्त करने पर बधाई दी एवं कहा कि स्याल को उनके जनून एवं लगन को देखते हुए मानद प्रतिबद्धता के साथ डॉक्टरेट की उपाधि से भी सम्मानित किया गया। मीनाक्षी स्याल ने कहा कि उन्हें यह सफलता उन्हें डीएवीसीएमसी, नई दिल्ली एवं प्रिंसिपल डॉ. अजय सरीन द्वारा उन पर पूर्ण विश्वास से हासिल हुई है। स्याल राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के पुरस्कारों से भी सम्मानित हैं। उन्होंने व्यापक रूप से यूएसए, यूरोप, यूके और यूएई की भीयात्रा की है ताकि वे खुद को शिक्षा और प्रौद्योगिकी के नवीनतम नवाचार से परिचित करवा सकें।







