

बयूरो : खालिस्तान के मुद्दे को लेकर पंजाब ने हिन्दू-सिखो के मामले को लेकर बीस दशकों तक एक लम्बा संताप भुगता है। जैसे-तैसे तत्कालीन सरकार ने इस मुद्दे को लेकर आंतक के रुप में उभरी उन गुंडा ताकतो को तब शांत तो किया पर वर्तमान स्थितियों में लग रहा है कि आंतकवाद को अब किसानी चोला देकर पंजाब में पुन: हिंसा का माहौल बनाये जाने की कोशिशें जारी है। यदि स्मरण करें तो पंजाब का बीस दशकों तक उभरा आंतकवाद तब भी पंजाब के ज्यादातर गाँवों की ही देन सम्बंधित था और उसके पीछे भी विदेशी फार्मूला था। आज भी हम लोग किसान मोर्चा के पूरा घटनाक्रम पर यदि पूरी ईमानदारी से दृष्टि डालते है तो यह बात अपने आप को दोहराती हुई नज़र आती है, बस इस बार आंतकवाद का रुप थोड़ा बदला गया हैl दो टाइम का चूल्हा जलाने के लिए आढ़तियों, बैंकों, सरकारों पर पर मुफ्त बिजली-पानी के लिए आश्रित रहने वाला किसान दबंगई रूप में हक़ के नाम पर वह मांगने को उतारू है। जिसकी सही जानकारी तक उसे नहीं है। इसके लिए उसे चाहे किसी भी राजनितिक पार्टी के प्रतिनिधियों को थप्पड़ मारने पड़े या फिर कपडे फाड़ने पड़े, उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। बात सोचने की है कि सारा देश जानता है कि पंजाब के किसानो को देश के हर राज्य से अधिक सुविधाएं प्राप्त है। मामला चाहे बिजली का हो, मंडीकरण का हो या फिर पराली का हो। ऐसे में पंजाब में पिछले लगभग एक वर्ष से चल रहे परिवेश में किसान अब आंतकी रूप में क्यों बेनाब हुए है। पंजाब में पहले खालिस्तान की रचना कर पंजाब के युवाओं को पहले ऩशे की गर्त में डुबो कर अपना मामला हल करने की कोशिशे की वह लगभग दो दशको तक कोई मुद्दा न मिलने पर इन ताकतो ने जो पेशगियाँ युवाओं को दी थी, अब युवा बर्जुग हो चुकी उसी पीढ़ी के हाथ में दोबारा सौंप दी दिखाई दे रही। अगर आपने अपनी कार, मोटरसाइकिल या किसी भी वाहन पर नीला, पीला झंडा लगा लिया तो आपको यह सुविधा है कि पंजाब से लेकर दिल्ली तक आपको कोई रोकेगा नहीं, अगर रोकेगा तो किसान नेताओं के रूप में विदेशी ताकतों द्वारा समर्थित नेताओं के गुमराह नेता सड़कों पर जाम लगा देंगे। जिस पीढ़ी ने आंतकवाद का संताप नहीं भुगता, उस पीढ़ी को विदेशी, खालिस्तानी, पन्नू जैसी ताकतों के मंसूबे नज़र नहीं आते। समझना होगा कि मामला क्या है, किसी भी विधायक, सरपंच जा पार्षद को बेइज़्ज़त करके भगाना, यह पंजाब के अन्न दातायों का काम नहीं हो सकता। जिन्होने यह किया है और जिनके साथ हुआ और जो लोग इससे आहात हुए है, उनका मानना है की पंजाब में खालिस्तान अब पीली चादर छोड़ कर हरी चादर ओढ़ कर प्रवेश करने को है। समय रहते मामले की गम्भीरता को समझे वर्ना हरी चादर ओढ़े किसान पीटेगें भी और फरियाद भी नहीं करने देगें।







