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पंजाब : स्कूल फीस को लेकर आखिर क्यों अभिभावक करते है स्कूल परिसरों को ‘Target’, पढ़ें क्या है माननीय अदालत के आदेश

फीस न देने वाले बच्चे के नही रुकेंगे रिजल्ट, लेकिन नही मिलेगा TC : CASA प्रधान अनिल चोपड़ा

– इंडस्ट्री को मिलती है सब्सिडी फिर शिक्षा क्षेत्र के कारोबारियों को क्यों नही : निजी स्कूल मालिक

– ट्रांसपोर्ट फीस नही वसूल रहे स्कूल फिर भी सरकार ले रही है ‘Permit’ फीस : स्कूल प्रबंधक

– अभिभावकों के इस रवैये से पंजाब में घटेगी शिक्षा क्षेत्र में होने वाली इन्वेस्टमेंट : NRI

बयूरो : स्कूल फीस को लेकर महामारी के दौरान अभिभावकों व स्कूल प्रबन्धकों में खासी टसल चलती देखी जा सकती है। ऐसे में माननीय अदालत के आदेशों के बावजूद अखित क्यों अभिभावक स्कूल परिसरों को टारगेट करते है। इसका स्पष्ट कारण है या तो आदेश बारे समझ नही या तो समझना नही चाहते।

आइए पहले माननीय अदालत के स्कूल फीस सम्बन्धी आदेश को पाठकों को समझा देते है। दरअसल कोरोना महामारी दौरान कई राज्यों में कई याचिकाएं विभिन्न माननीय अदालतों में दस्यर हुई लेकिन हम बात करते है पंजाब से सम्बंधित स्तिथि की। दरअसल माननीय सुप्रीम कोर्ट में फीस वसूली को लेकर लंबित याचिका में राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को ही लागू करने के आदेश दिए है जिसमे कहा गया है कि स्कूल प्रबन्धन 2020-21 अकादमिक वर्ष की फीस (जोकि 2019-20 अकादमिक वर्ष जितनी ही बनेगी कोविड महामारी के चलते) को 5 मार्च से 5 अगस्त, 2021 के मध्य 6 किश्तों में वसूल सकते है। और 2021-22 की फीस को रूटीन में वसूला जा सकता है। इसके साथ ही माननीय कोर्ट ने स्कूलों को भी आदेश दिए है कि किसी भी फीस न भर पाने वाले विद्यार्थी का नाम ऑनलाइन/ऑफलाइन क्लासेज से नही काटा जा सकता। या न ही रिजल्ट रोका जाएगा।

उपरोक्त आदेश से स्पष्ट है कि अभिभावकों को फीस देनी ही होगी। अगर कोई स्पेशल केस है जिसमे अभिभावक फीस नही दे पाते उसमें सीधे तौर पर स्कूल प्रबंधक व अभिभावक मामले को सुलझाएंगे जिसमे आम तौर पर स्कूल प्रबंधक नरमी ही बरतते है। इस बारे CBSE एफिलिएटेड स्कूल एसोसिएशन के प्रधान अनिल चोपड़ा ने बहुत पहले स्पष्ट कर दिया हुआ है कि फीस न देने वालो के न रिजल्ट रुकेंगे न नाम कटेंगे परन्तु कोई अभिभावक आने बच्चे का रिजल्ट लेकर बिना फीस दिए दूसरे किसी स्कूल में दाखिला न ले, इसीलिए TC जारी नही किया जाएगा ताकि किसी स्कूल प्रबन्धक ऐसी स्तिथि का शिकार न हो।

इस बारे निजी स्कूल प्रबन्धको ने कहा कि केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार इंडस्ट्री को सब्सिडी मुहैया करवाई जाती है लेकिन शिक्षा क्षेत्र में कारोबार करने वाले उद्योगपतियों को किसी प्रकार की सब्सिडी नही मिलती। इसी तरह कुछ स्कूल प्रबन्धको ने कहा कि जहां एक ओर माननीय अदालत के आदेशों पश्चात भी स्कूल वर्ष 2021-22 की ट्रांसपोर्ट फीस तब तक नही वसूलना चाहते जब तक सरकारी आदेशानुसार स्कूल बंद है लेकिन सरकार ने बसों की परमिट फीस वसूलनी आरम्भ कर दी है। यह कहां तक जायज है। इस विषय मे कुछ NRI ने कहा कि वह 2 वर्ष पहले पंजाब में शिक्षा क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट बारे सोच रहे थे लेकिन 6-8 माह पहले उन्होंने यह आईडिया ड्राप कर दिया क्योंकि जहां माननीय कोर्ट के आदेशो के बावजूद अभिभावक फीस नही देना चाहते वही फीस की मांग करने पर स्कूल परिसरों को टारगेट करते है। ऐसे में स्तिथि स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में होने वाली इन्वेस्टमेंट घटेगी।