

ब्यूरो : हंसराज महिला महाविद्यालय, जालन्धर में प्रिंसिपल डॉ. अजय सरीन के कुशल मार्गदर्शन में जल संरक्षण वपुनः उपयोग के लिए लगातार कदम उठाए गए हैं। इस हेतु भूजल संवर्धन के लिए कई नवीन रणनीतियां तैयार की गई है। संस्था परिसर में जल स्तर को व्यवस्थित करने हेतु दस यूनिट स्थापित कर वर्षा जल को सुरक्षित करने की नवोन्मेष कार्य नीतिनिर्धारित की गई हैं। बारिश के पानी को संग्रहित करने की कार्य नीति सीचे वाल मॉडल की कार्यनीति के उपरांत संस्था द्वारा अपनाई गई जैसे कि राष्ट्र आवर्ती जल की कमी के मुद्दों से पीड़ित है, इसलिए उचित जल प्रबंधन समय की आवश्यकता है। अपनी पर्यावरणीय जिम्मेवारी के प्रति सुचेत रहने वाले एच.एम.वी. ने पानी के संरक्षण के लिए एक बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। वॉश रूम से गिरे पानी को बागबानी, सफाई, धुलाई, कपड़े धोने इत्यादि के लिए संग्रहित और पुनः उपयोग किया जाता है। पानी के री-साइकिल और पुनः उपयोग के लिए विशेषटैंक प्लेसमेंट किए गए हैं, जिसमें पानी की बहुत बचत हुई है। ए.सी. के व्यर्थ जल को भी सफाई के लिए भी पुनः उपयोग किया जाता है। महाविद्यालय में जल जागरूकता के लिए नियमित रूप सेजागरूकता गतिविधियां की जाती हैं जैसे विश्व जल दिवस, जल प्रतिज्ञा इत्यादि। पानी को बचाने के लिए नवीन वृक्षारोपण किया जाता है।विश्वजल दिवस के अवसर पर प्रिंसिपल डॉ. अजय सरीन ने जल संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। डीन इनोवेशन एंड रिसर्च डॉ. अंजना भाटिया ने परिसर में पानी के पुनः उपयोग के लिए सहायक कर्मचारियों को एक जागरूकता व्याख्यान दिया।







