


– कहा : क़र्ज़दार होने से अच्छा काम बंद करना बेहतर विकल्प
ब्यूरो : इंडियन आयल जालंधर टर्मिनल पर पेट्रोल डीज़ल ढुलाई के नये टेंडर मे तय किए फ़ोरमुला से सभी ट्रांसपोटर पहले दिन से ही परेशान चल रहे है क्युकी इस फ़ोरमुला के अनुसार जो काम बड़े टैंकरों को मिल रहा है उसकी वजह से तो बैंक की किश्तें एवं ड्राइवर हेल्परो को मासिक वेतन देना भी मुशकिल हो गया है उक्त बात इंडियन आयल जालंधर के टैंकर ट्रांसपोटर ने एकजुट होकर कही जिसके बाद सभी ट्रांसपोटर साथियों ने जालंधर टर्मिनल इंचार्ज को सात दिन बाद पेट्रोल डीज़ल की सप्लाई मजबुरन बंद करने का पत्र दे दिया है।
इस विषय पर बातचीत करने पर टैंकर ट्रांसपोटरो ने बताया की जिस नये फ़ोरमुला मे इंडियन आयल ने हमको टेंडर मे छोटे टैंकर बदल कर बढ़े टैंकर चलाने का लाभ बताकर काम दिया है उस से हम बेहद परेशान है क्युकी एक बड़ा टैंकर ज्यदा से ज्यदा चालीस हज़ार का मात्र काम कर रहा है जबकि एक गाड़ी का कम से कम। खर्चा एक लाख के क़रीब आ रहा है। इसके बारे मे हम सभी ट्रांसपोटरो ने चंडीगढ़ मे बैठे पंजाब इंडियन आयल के प्रमुख इ.ड़ी व जी.एम ऑपरेशन को नये टेंडर नियमो की ख़ामियों के बारे अवगत करवाया था।जिन्होंने आश्वासन दिया था की 15 मार्च तक सभी की मुश्किलों को समाप्त कर दिया जाएगा जो नही हुआ। इसलिए हम सब के लिए क़र्ज़दार होने से अच्छा काम बंद करना बेहतर विकल्प है। क्युकी इंडियन आयल का सेल वॉल्यूम कम नही हुआ परंतु इंडियन आयल के टैडर वाले नये फ़ोरमुला से सभी ट्रांसपोटरो का काम ना के बराबर हो गया है।
इस बारे एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आइ है की इंडियन आयल मे ट्रांसपोटरो की पिछले टैडर मे 250 के क़रीब टैंकर चलते थे इस बार केवल 127 टैंकर चलाए गये। जिसकी वजह से ट्रांसपोटरो के साथ-साथ 300 के क़रीब ड्राइवर हेल्पर भी बेरोज़गार हो गये है। दूसरी तरफ जिनको नया टैडर मिला वो भी दिन प्रतिदिन नए नियमो की वजह से बढ़ रही कर्ज़े की मार से परेशान है। इसलिए जिनको मिला जिनको नही टैडर मिला सभी रो रहे।







