अगर खेती अच्छी हालत में थी, तो हमारा ‘अन्न दाता’ आत्महत्या क्यों कर रहा है।
बयरो: पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में अपने सैकड़ों किसानों को खो दिया है जबकि राजनीतिक संगठनों ने, जो बिल का विरोध कर रहे हैं, राज्य में किसानों द्वारा आत्महत्या को रोकने के लिए कुछ नहीं किया है। खेती बिल पर नहीं, किसानों पर कर्ज के बोझ पर चिंता की जरूरत है। पंजाब में सरकार बनाने के लिए वोट मांगने के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों का पूरा कर्ज माफ करने का वायदा किया था, लेकिन अब 4 साल के शासन के बाद भी हमारे किसानों को कर्ज के चंगुल से बचाने के लिए कुछ नहीं किया जा सका। कैप्टन तो चाहते ही हैं कि किसान आंदोलन 2022 तक चले ताकि उनसे किसानों और पंजाब की जनता से किये झूठे वायदों का हिसाब न मांगा जा सके। पंजाब में अभी भी कर्ज के दबाव में डूबे हमारे किसान भाई आत्महत्या कर रहे हैं, जो कि वास्तविक मुद्दा है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।







