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LPU के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर द्वारा दुनिया के इकोसिस्टम की बहाली के लिए आह्वान

• “दुनिया भर में कोविड -19 महामारी के मद्देनज़र हम सभी की खुशहाली के लिए ‘स्वस्थ धरती’ की आवश्यकता “: डायरेक्टर लुधियाना स्मार्ट सिटी, आर्किटेक्ट संजय गोयल

• “पृथ्वी पर हवा, पानी और ध्वनि में प्रदूषण को कम करें” : आर्किटेक्ट संजय गोयल

• “स्वस्थ प्लेनेट विकल्प नहीं अपितु आवश्यकता है”: एलपीयू के डीन व चीफ आर्किटेक्ट अतुल सिंगला

• अवसर था एलपीयू के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन (एलएसएडी) द्वारा ‘रिस्टोर द अर्थ’ विषय पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स के पंजाब चैप्टर तथा जालंधर सेंटर द्वारा एलपीयू कैंपस में ‘वर्ल्ड अर्थ डे ‘ के लिए संयुक्त उत्सव

ब्यूरो : लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन (एलएसएडी) ने दुनिया के सभी वास्तुकारों, विद्यार्थियों और नागरिकों को दुनिया के ‘इकोसिस्टम’ को बहाल करने के लिए आमंत्रित किया। दुनिया भर में वर्तमान को कोविड -19 महामारी से जोड़ते हुए एक संदेश दिया गया कि हमारे सभी के पास साथ साथ रहते हुए अपनी धरती को फिर से संभालने की प्रबल शक्ति है। यह अवसर था एलपीयू के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन द्वारा ‘रिस्टोर द अर्थ’ विषय पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स के पंजाब चैप्टर तथा जालंधर सेंटर द्वारा एलपीयू कैंपस में ‘वर्ल्ड अर्थ डे ‘ के लिए संयुक्त उत्सव के आयोजन का जिसमे देश-विदेश के कई वास्तुकारों, अध्यापकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। देश के जाने-माने आर्किटेक्ट, पंजाब चैप्टर के अध्यक्ष तथा लुधियाना स्मार्ट सिटी (लि) के डायरेक्टर संजय गोयल इस प्रोग्राम के मुख्य वक्ता थे। गोयल ने कहा कि वर्तमान विश्वव्यापी महामारी परिदृश्य में, हम सभी को अपनी आजीविका, स्वास्थ्य, अस्तित्व, खुशी का समर्थन करने और सर्वांगीण समृद्धि के लिए ‘स्वस्थ धरती’ की अति आवश्यकता है। उन्होंने सभी को ‘धरती माता’ का सम्मान करने के लिए कहा, और पृथ्वी पर हवा, पानी और ध्वनि को प्रदूषित न करने की सलाह दी। एलपीयू में डीन एंड चीफ आर्किटेक्ट अतुल सिंगला ने भी कहा कि स्वस्थ प्लेनेट (ग्रह) कोई विकल्प नहीं अपितु एक आवश्यकता है।
एलपीयू में मनाया गया विषय प्राकृतिक प्रक्रियाओं; उभरती ग्रीन टेक्नोलॉजी; और इनोवेटिव सोच पर केंद्रित है जो दुनिया के पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल कर सकती हैं। यह हम सब पर निर्भर है कि हम “पृथ्वी को पुनर्स्थापित करें” क्योंकि हम ही इस पर रहते हैं। महामारी के दिनों में इस महत्वपूर्ण वर्चुअल सत्र में आर्किटेक्ट सुरिंदर बाघा, एचओडी प्रोफेसर आर्कि नागेंद्र नारायण, प्रोफेसर आर्कि हिममत भाटिया, फैकल्टी और एलएसएडी के विद्यार्थी, आर्कि दिनेश भगत, आर्कि योगेंद्र सिंगला, आर्कि प्रितपाल सिंह, आर्कि राजिंदर संधू, आर्कि अनमोल पपनेजा, आर्कि संजीव अग्रवाल, आर्कि हरिंदर बोपारई और देश-विदेश के कई अन्य प्रमुख आर्किटेक्टस ने भाग लिया।