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जालंधर कैंटोनमेंट बोर्ड में अफसरशाही व तानाशाही है हावी, पढ़ें RTI में हुआ खुलासा

ब्यूरो : कैंटोनमैंट बोर्ड जालन्धर छावनी मे अफसर शाही और तानाशाही रवैये का तो ये आलम है की छावनी निवासीयों के मुंह से अकसर यही सुनने को मिलता है की भगवान किसी दुश्मन को भी कैंटोनमैंट बोर्ड जालन्धर छावनी से कभी कोई काम न पढ़े। कैंटोनमैंट बोर्ड पब्लिक इंफोरमेशन आफिसर के तो मिजाज ये हैं की उन्होने तो आर.टी.आई का शब्दिक अर्थ का ही अनर्थ कर दिया राइट टू इंफोरमेशन के स्थान पर “राइट टू इगनोर” बना दिया। कैंटोनमैंट बोर्ड जालन्धर छावनी प्रशासन द्बारा हरदयाल रोड़ पर स्थित 1.78 एकल विवादित सरकारी जमीन पर मस्जिद निर्माण की अनुमति एवं तृतीय पक्ष के नाम जमीन के मालिकाना हक़ असंवैधानिक तरीके से किये जाने के विषय पर एक आर टी आई को दो आर टी आई भारतीय डाक द्बारा भेजी गई। जिसका तीस दिनों तक निर्धारित समय अवधि में कैंटोनमैंट बोर्ड जालन्धर छावनी के संबधित अधिकारियों की ओर से जवाब नही दिया गया। इन आर टी आई के जवाब न मिलने पर प्रथम अपीलीय अधिकारी को प्रथम अपील एवं उनके व्यक्तिगत नं पर whatsapp कर जवाब के लिए आग्रह किया गया। लेकिन नतीजा वही कैंटोनमैंट बोर्ड जालन्धर छावनी के तानाशाही रवैये के आगे प्रथम अपील को भी दर किनार किया जा रहा है। तानाशाही रवैये की हद तो उस समय हुई जब संबधित आर टी आई के विषय मे कैंटोनमैंट बोर्ड जालन्धर छावनी के अधिकारी से पूछा गया तो उन्होने कहा की आपकी आर टी आई का जवाब तो पिछले एक सप्ताह से मेरे पास तैयार है लेकिन वह बिना CPIO के हस्ताक्षर के आपको नही दिया जा सकता हैरानी का विषय तो यह है जनाब 9 से 5 की नौकरी मे CPIO साहब के पास हस्ताक्षर करने का समय नही है। कल जब आर.टी.आई का जवाब दिया गया तो वो भी आर.टी.आई की धारा 8(1) का दुरुपयोग करके तथ्यों को छिपाने और आर.टी.आई मे मांगी गई जानकारी को अपनी सुविधा अनुसार तोड़ मरोड़ कर सरकारी सम्पति और सार्वजनिक पूजा स्थलों को भी व्यक्तिगत करार देना और तृतीय पक्ष का विरोध दर्ज कर विषय की सम्पूर्ण जानकारी न देना तो कैंटोनमैंट बोर्ड के लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के लिए आम बात है, आर.टी.आई मांगने वाले अनेकानेक लोगो को मानसिक रूप से परेशान करने मे तो कैंटोनमैंट बोर्ड जालन्धर छावनी के प्रशासनिक अधिकारियों को बहुत ही आनंद की अनुभूति होती है।