




ब्यूरो : हंसराज महिला महाविद्यालय, जालंधर में महात्मा हंसराज जी का जन्मोत्सव पूर्णश्रद्धा के साथ मनाया गया। इस शुभ अवसर पर टीचिंग तथा नॉन-टीचिंग के सभी सदस्यों ने महात्मा जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर जिला प्रशासन की विशेष अनुमति तथा अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के सहयोग सेविशेषटीकाकरण कैंप (कोविड -19) का आयोजन संस्था परिसर में किया गया प्रिंसिपल डॉ. अजय सरीन ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा जी परोपकार के प्रणेता तथा पथ – प्रदर्शक थे। उन्होंने अपने जीवन का एक – एक क्षण परोपकार और पर दुःख हरण में व्यतीत किया। उन्होंने उनके जीवन के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि वह केवल चालीस रुपए मासिक पर गुजारा करते थे स्वप्राप्त गरीबी में दिन काटना सबसे कठोर तपस्या है।
दुःख – सुख, रोग अरोग, मान – अपमान, प्रसन्नता – अप्रसन्नता की अपेक्षा किए बिनाजो कर्तव्य अपने कंधेलेलिया, उसे निभाते जाना ही सच्चा तप है। उनका समाज कल्याण, राष्ट्रहित तथा शिक्षा के लिए उनका योगदान अविस्मरणीयत था अनुकरणीय है हम सबको उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए साथ ही उन्होंने प्रधान डी.ए.वी. प्रबन्ध की समिति पद्मश्री डॉ. पूनम सूरी का संदेश सबके साथ सांझा किया। इस सुअवसर पर डी.ए.बी. कॉलेज जालन्धर के प्रिंसिपल डॉ.एस.के. अरोडा ने भी महात्मा जी के जीवन पर झांकी इलवाई और उनके बड़े भाई मुल्क राज के उनके जीवन में योगदान को याद किया। इस उपलक्ष्य में डीन अकादमिक डॉ. कंवलदीप कौर ने कहा कि महात्मा हंसराज जी का जीवन परोपकार व लोक कल्याण के मार्ग पर चलते हुए सम्बन्धों की वनिष्ठता बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है। सस्कृतविभागाध्यक्षा डॉ. मीनू तलवाड़ ने अपने विचार सांझे करते हुए कहा कि निरन्तर 58 वर्षों तक एकरसरहकर एक ध्येय को लेकर चलते रहना बहुत कठिन काम है। आजन्म पग – पग पर विघ्न – बाधाओं का डटकर मुकाबला करते हुए अपने पथ से विचलित न होना सबसे बढ़कर वीरता, पराक्रम और साहस की बात है विपरोपकार के जीवित आदर्श थे। इस कार्यक्रम के अन्त में डीन वैदिक स्टडीज ममता ने इस सभा में उपस्थित प्रिंसिपल डी.ए.बी. कालेज डा. एस.के. अरोडा, प्रिंसिपल डॉ. अजय सरीन, फैकल्टी मैंबर्स व स्टाफ सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापित किया तथा महात्मा जी के समक्ष नतमस्तक होकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।







