
– मोहिंदर भगत के सक्रिय न होने से पार्षदों व वर्करों का उत्साह पड़ा ठंडा
– न पार्षदों की सुन रहे हैं भगत न ही वर्करों की
– कई भाजपा नेता कांग्रेस व आम आदमी के संपर्क में
(अभिनंदन भारती ) : किसान आंदोलन की मार झेल रही भाजपा के नेता भी अब घरों में दुबकने लगे हैं। सबसे बुरा हाल तो वैस्ट विधानसभा हलके में हैं। यहां भाजपा के संभावित उम्मीदवार मोहिंदर भगत के निष्क्रिय होने का लाभ पूरी तरह से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को मिल रहा है। मोहिंदर भगत को अपनी ही पार्टी के पार्षदों व वर्करों पर कोई विश्वास नहीं है। इलाके के भाजपा पार्षद तो बेहद सक्रिय हैं और समय समय पर नगर निगम व कांग्रेस विधायक को आम जनता के मुददों को लेकर घेरते रहते हैं, मगर चुनावों की तैयारी कर रहे मोहिंदर भगत कहीं दिखाई नहीं देते। मोहिंदर भगत की उपस्थिति मात्र संस्कार और किरया के प्रोग्रामों तक ही रह गई है या फिर महज अखबारों में बयानबाजी तक। मोहिंदर भगत के निष्क्रिय रहने से वैस्ट हलके के पार्टी वर्करों का जोश भी ठंडा पड़ गया है और चुनावों से एक साल पहले ही वह हार मानकर घर बैठ गए हैं। मोहिंदर भगत की निष्क्रियता पार्टी हाईकमान को भी रास नहीं आ रही है। पार्टी हाईकमान भी जानती है कि कांग्रेस के मौजूदा विधायक सुशील रिकू का मुकाबला करना मोहिंदर भगत के वश की बात नहीं है। ऐसे में अब हलके में नए संभावित उम्मीदवार की तलाश भी अंदर खाते भाजपा हाईकमान ने शुरू कर दी है। गौर हो कि पिछला चुनाव मोहिंदर भगत वैस्ट हलके से कांग्रेस के नेता सुशील रिकू से तकरीबन 18 हजार वोटों के भारी अंतर से हारे थे। पार्टी को उम्मीद थी कि हार के बाद भगत कुछ सबक लेंगे और खुद को जनता के साथ जोड़ेंगे, मगर पिछले 4 साल में वह बेहद असफल साबित हुए है। हैरानी की बात तो यह है कि जब पार्टी के पार्षदों व वर्करों को मोहिंदर भगत की जरूरत होती है तो वह उनके साथ खड़े नहीं होते हैं। ऐसे में कई भाजपा नेता आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी या कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं।







