


-शहरी हलके में यूथ प्रधान तक नहीं मिल रहा
-हिंदू वोट बैंक व उद्योग जगत ने अकाली दल से बनाई दूरी
ब्यूरो : भाजपा से अलग होने के बाद शिरोमणि अकाली दल का शहरी वोट बैंक पूरे पंजाब में साफ हो गया है । भाजपा से दूरी बनाने के बाद अकाली दल ने कभी भी शहरी वोट बैंक को अपना बनाने का कोई प्लान नहीं बनाया। अकाली दल ने शुरु से ही खुद को ही टकसाली सिख पार्टी बनाकर रखा। ऐसे में हिंदू वोट बैंक से पार्टी ने हमेशा दूरी बनाए रखी और संसद में जिस तरह से पार्टी की नेता हरसिमरत कौर बादल ने हिंदुओं के खिलाफ अपना जहर उगला था, उससे भी शहरी वोट बैंक और हिंदू वोट बैंक खासा नाराज चल रहा है। इसके साथ ही 10 साल सत्ता में रहने और अब 4 साल विपक्ष में रहने के बाद भी अकाली दल ने कभी उद्योग जगत की बांह नहीं पकड़ी। जिसके चलते सभी इंडस्ट्रीलिस्ट और व्यापारी इस पार्टी से दूरी बना रहे हैं। किसान आंदोलन के हाथ से छिटक जाने के कारण पहले ही अकाली दल का देहाती हलकों में आधार कम हो रहा और अब शहरी हलकों व उद्योग जगत और हिंदू वोट बैंक के छिटक जाने से अकाली दल के लिए 2022 की राह बेहद मुश्किल साबित हो रही है। शहरी हलकों में तो हालात यह है कि पार्टी के पास एक भी मजबूत हिंदू नेता नहीं है और न ही पार्टी को शहरी हलके में यूथ प्रधान तक ही मिल पा रहा है।







