ब्यूरो : डीएवी यूनिवर्सिटी ने महान समाज सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस समारोह का उद्देश्य महिलाओं के लिए समान अधिकारों को बढ़ावा देने और सामाजिक परिवर्तन लाने में स्वामी दयानंद सरस्वती के योगदान के बारे में जागरूकता पैदा करना था। समारोह की शुरुआत परिसर में नवनिर्मित यज्ञशाला में आयोजित यज्ञ से हुई। यज्ञशाला के आस-पास यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों का प्रतिनिधित्व करते हुए दस हवन कुंडों में भी यज्ञ किया गया जिसमें शिक्षण, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और छात्रों के सदस्यों ने यज्ञ किया।
पूरा परिसर वैदिक मंत्रों के जाप से गूंज उठा। कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए यूनिवर्सिटी की कार्यवाहक वाईस-चांसलर डॉ. जसबीर ऋषि ने कहा कि स्वामी जी ने मूर्तिपूजा और कर्मकांड का विरोध किया और वैदिक विचारधाराओं को पुनर्जीवित करने के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने ही सबसे पहले 1876 में स्वराज की बात करते हुए “भारतीयों के लिए भारत” का नारा दिया था जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने अपना लिया। उन्होंने कहा कि यज्ञशाला की नींव यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. पूनम सूरी ने रखी थी।
डॉ. सूरी चाहते हैं कि प्रत्येक छात्र स्वामी दयानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग पर चले। उन्होंने यह भी बताया कि चांसलर डॉ पूनम सूरी ने छात्रों के उज्जवल भविष्य के लिए आशीर्वाद भेजा है। इससे पहले, अतिथियों और छात्रों का स्वागत करते हुए कार्यवाहक रजिस्ट्रार डॉ. के.एन कौल ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने स्वामी श्रद्धानंद, भगत सिंह, लाला हरदयाल, मदन लाल ढींगरा, राम प्रसाद बिस्मिल, महात्मा हंसराज और लाला लाजपत राय सहित कई लोगों को प्रभावित किया। समारोह में डॉ. आर.के सेठ, डीन एकेडमिक्स (कार्यवाहक) और विभिन्न विभागों के कोऑर्डिनेटरों सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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